सड़क की जर्जर हालत और प्रशासन की बेरुखी के खिलाफ जब जनता का सब्र टूटा, तो उन्होंने विरोध का एक ऐसा अनोखा तरीका अपनाया जिसने आखिरकार सोए हुए लोक निर्माण विभाग को जगा ही दिया। कैमोर-कटनी देवरीमझगवा मुख्य मार्ग पर जानलेवा बन चुके गड्ढों में स्थानीय निवासियों द्वारा बेसरम के पौधे रोपे जाने के बाद विभाग हरकत में आया है। खबर मिलते ही लोक निर्माण विभाग ने आनन-फानन में मार्ग के गड्ढों को भरने का कार्य शुरू कर दिया है।
क्या था पूरा मामला?
कैमोर से कटनी को जोड़ने वाला देवरीमझगवा मार्ग लंबे समय से बदहाली का आंसू रो रहा था। सड़क पर इतने बड़े और गहरे गड्ढे हो चुके थे कि राहगीरों का पैदल चलना भी दूभर था। आए दिन दुपहिया वाहन चालक इन गड्ढों के कारण दुर्घटना का शिकार हो रहे थे। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों द्वारा कई बार शिकायत करने के बावजूद जब विभाग के कानों पर जूं नहीं रेंगी, तो ग्रामीणों ने विरोध का अनूठा रास्ता चुना।
ग्रामीणों ने सड़क के बीचों-बीच बने बड़े गड्ढों में मिट्टी डालकर बेसरम
के पौधे लगा दिए। यह प्रदर्शन सोशल मीडिया और स्थानीय हलकों में चर्चा का विषय बन गया, जो सीधे तौर पर विभाग की बेशर्मी और उदासीनता पर करारा व्यंग्य था।
जागी कुंभकर्णी नींद, शुरू हुआ सुधार कार्य
बेसरम के पौधे रोपने की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद लोक निर्माण विभाग के आला अधिकारियों में खलबली मच गई। अपनी फजीहत होते देख विभाग ने तुरंत संज्ञान लिया और गिट्टी,मुरुम और डस्ट व मजदूरों की टीम भेजकर सड़क के गड्ढों को भरने का काम युद्धस्तर पर शुरू करवाया।
स्थानीय लोगों की मांग: गड्ढा भराई सिर्फ लीपापोती न हो, मिले स्थायी समाधान
हालांकि विभाग द्वारा काम शुरू किए जाने से राहगीरों ने थोड़ी राहत की सांस ली है, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह केवल तात्कालिक लीपापोती है। बारिश के मौसम में गिट्टी,मुरुम और डस्ट बह जाएगी और स्थिति जस की तस हो जाएगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मुख्य मार्ग का पूरी तरह से डामरीकरण किया जाए ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
फिलहाल, इस अनोखे प्रदर्शन और उसके बाद विभाग की त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि अगर जनता एकजुट होकर अपनी आवाज उठाए, तो प्रशासन को झुकना ही पड़ता है।अनोखा प्रदर्शन लाया रंग,
कैमोर-कटनी देवरीमझगवा मार्ग पर बेसरम के पौधे रोपे जाने के बाद जागा लोक निर्माण विभाग, गड्ढे भरने का काम शुरू
सड़क की जर्जर हालत और प्रशासन की बेरुखी के खिलाफ जब जनता का सब्र टूटा, तो उन्होंने विरोध का एक ऐसा अनोखा तरीका अपनाया जिसने आखिरकार सोए हुए लोक निर्माण विभाग को जगा ही दिया। कैमोर-कटनी देवरीमझगवा मुख्य मार्ग पर जानलेवा बन चुके गड्ढों में स्थानीय निवासियों द्वारा बेसरम के पौधे रोपे जाने के बाद विभाग हरकत में आया है। खबर मिलते ही लोक निर्माण विभाग ने आनन-फानन में मार्ग के गड्ढों को भरने का कार्य शुरू कर दिया है।
क्या था पूरा मामला?
कैमोर से कटनी को जोड़ने वाला देवरीमझगवा मार्ग लंबे समय से बदहाली का आंसू रो रहा था। सड़क पर इतने बड़े और गहरे गड्ढे हो चुके थे कि राहगीरों का पैदल चलना भी दूभर था। आए दिन दुपहिया वाहन चालक इन गड्ढों के कारण दुर्घटना का शिकार हो रहे थे। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों द्वारा कई बार शिकायत करने के बावजूद जब विभाग के कानों पर जूं नहीं रेंगी, तो ग्रामीणों ने विरोध का अनूठा रास्ता चुना।
ग्रामीणों ने सड़क के बीचों-बीच बने बड़े गड्ढों में मिट्टी डालकर बेसरम
के पौधे लगा दिए। यह प्रदर्शन सोशल मीडिया और स्थानीय हलकों में चर्चा का विषय बन गया, जो सीधे तौर पर विभाग की बेशर्मी और उदासीनता पर करारा व्यंग्य था।
जागी कुंभकर्णी नींद, शुरू हुआ सुधार कार्य
बेसरम के पौधे रोपने की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद लोक निर्माण विभाग के आला अधिकारियों में खलबली मच गई। अपनी फजीहत होते देख विभाग ने तुरंत संज्ञान लिया और गिट्टी,मुरुम और डस्ट व मजदूरों की टीम भेजकर सड़क के गड्ढों को भरने का काम युद्धस्तर पर शुरू करवाया।
स्थानीय लोगों की मांग: गड्ढा भराई सिर्फ लीपापोती न हो, मिले स्थायी समाधान
हालांकि विभाग द्वारा काम शुरू किए जाने से राहगीरों ने थोड़ी राहत की सांस ली है, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह केवल तात्कालिक लीपापोती है। बारिश के मौसम में गिट्टी,मुरुम और डस्ट बह जाएगी और स्थिति जस की तस हो जाएगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मुख्य मार्ग का पूरी तरह से डामरीकरण किया जाए ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
फिलहाल, इस अनोखे प्रदर्शन और उसके बाद विभाग की त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि अगर जनता एकजुट होकर अपनी आवाज उठाए, तो प्रशासन को झुकना ही पड़ता है
इंडियन टीवी न्यूज़ कैमोर से श्याम गुप्ता की रिपोर्ट