✍ किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
बस्तर की नदियों पर रेत माफिया का कब्ज़ा, प्रतिबंध बेअसर, खनिज विभाग मौन
बस्तर। जिले में 10 जून से रेत उत्खनन पर लगाए गए सरकारी प्रतिबंध के बावजूद अवैध खनन का कारोबार खुलेआम जारी है। आरोप है कि बजावंड, टलनार और तारापुर क्षेत्र की रेत खदानों में दिनदहाड़े पोकलेन मशीनों की मदद से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है, जबकि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय मौन बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिबंध लागू होने के बाद भी बिना किसी रोक-टोक के हाइवा और अन्य भारी वाहन रेत का परिवहन कर रहे हैं। कई वाहनों के पास वैध ट्रांजिट पास (टीपी) नहीं होने के बावजूद वे सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे शासन को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, रेत कारोबार से मिलने वाली सरकारी रॉयल्टी में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहां पहले राजस्व संग्रह लगभग 17 लाख रुपये तक पहुंचता था, वहीं अब यह घटकर करीब 7 लाख रुपये रह गया है। इससे अवैध खनन और राजस्व चोरी के आरोपों को बल मिल रहा है।
पर्यावरणीय दृष्टि से भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। अवैध उत्खनन के कारण नदी किनारों और जलधाराओं में गहरे गड्ढे बन गए हैं, जो ग्रामीणों और पशुओं के लिए खतरा बन चुके हैं। बरसात के मौसम में इन गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटनाओं की आशंका और बढ़ गई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ये गहरे गड्ढे किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकते हैं।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा नदियों के प्राकृतिक स्वरूप को बचाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो पर्यावरण के साथ-साथ सरकारी राजस्व को भी लगातार नुकसान होता रहेगा।
फिलहाल, खनिज विभाग और प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे अवैध खनन को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।