रिपोर्ट अभिषेक पाण्डेय
नगर पंचायत मरवाही द्वारा लाखों की लागत से निर्मित अटल परिसर महज 6 महीने में ही खंडहर बन गया था। मामला उजागर होने के बाद नगर पंचायत में हड़कंप मच गया।
लेकिन सुधार के नाम पर नगर पंचायत ने जो किया, उसने पूरे सिस्टम पर ही सवाल खड़ा कर दिया।
जानकारी के अनुसार नगर पंचायत ने बिना किसी तकनीकी जांच, बिना इंजीनियर की रिपोर्ट और बिना वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के ही आनन-फानन में टेम्परेरी मरम्मत कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की।
टूटी-फूटी नालियों को मिट्टी डालकर ढक दिया गया
उखड़े हुए टाइल्स और फर्श पर सिर्फ ऊपर से सीमेंट का घोल लगा दिया गया
जगह-जगह पड़े कचरे को एक कोने से उठाकर दूसरे कोने में डाल दिया गया
इसे मरम्मत नहीं सीधा-सीधा सबूत मिटाने की कोशिश कहा जा रहा है।
जनता का सवाल अगर निर्माण में गड़बड़ी नहीं थी तो 6 महीने में परिसर टूटा क्यों? और अगर गड़बड़ी थी तो दोषी ठेकेदार और बिल पास करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई के बजाय लीपापोती क्यों की जा रही है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह टेम्परेरी मरम्मत 15 दिन भी नहीं टिकेगी और फिर से वही हाल हो जाएगा।
क्या यह भारत रत्न श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के सम्मान का अपमान नहीं है?
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि कलेक्टर, जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही इस लीपापोती मरम्मत पर रोक लगाते हुए पूरे निर्माण कार्य की फाइल जब्त कराएं और थर्ड पार्टी टेक्निकल टीम से जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करें।