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80वीं रामलीला में लंका दहन का भव्य मंचन, डॉ. राकेश कन्नौजिया ने जीता दिल

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दुद्धी (सोनभद्र)। अधर्म पर धर्म की विजय, अहंकार के अंत और प्रभु श्रीराम की भक्ति की शक्ति का अद्भुत संदेश लेकर दुद्धी विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम महुली की ऐतिहासिक रामलीला में शनिवार की रात लंका दहन की लीला का भव्य मंचन किया गया। दुद्धी ब्लॉक के श्री राजा बरियार शाह खेल मैदान में आयोजित 80वीं रामलीला के दसवें दिन पवनपुत्र हनुमान के अद्भुत पराक्रम और दशानन रावण के अहंकार का जीवंत चित्रण देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे। स्वर्णनगरी लंका में आग लगने के दृश्य और हनुमान जी के जयकारों से पूरा रामलीला मैदान गूंज उठा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुद्धी के पूर्व विधायक हरिराम चेरो ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण एवं पवनपुत्र हनुमान जी महाराज की आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद जायसवाल एवं उपाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार कन्नौजिया ने मुख्य अतिथि का माल्यार्पण कर अंगवस्त्र भेंट करते हुए स्वागत एवं सम्मान किया।
इस अवसर पर पूर्व विधायक हरिराम चेरो ने महुली की ऐतिहासिक धरती के प्रति अपना जुड़ाव व्यक्त करते हुए कहा कि राजा बरियार शाह की यह धरती गौरवशाली इतिहास और प्रतिभाओं की भूमि है। इस गांव ने आईएएस, आईपीएस अधिकारियों के साथ सांसद और विधायक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचने वाले व्यक्तित्व दिए हैं। उन्होंने कहा कि महुली से उनका विशेष लगाव है। यदि उन्हें पुनः विधायक बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ तो यहां रामलीला और दुर्गापूजा के आयोजन की समुचित व्यवस्था कराने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों, त्याग, सत्य, कर्तव्य और धर्म का संदेश जन-जन तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और मर्यादाओं की सीख मिलती है।
रामलीला के मंच पर लंका दहन का प्रसंग शुरू होते ही वातावरण रोमांच से भर उठा। माता सीता की खोज में लंका पहुंचे पवनपुत्र हनुमान ने अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट कर उन्हें प्रभु श्रीराम का संदेश दिया और शीघ्र ही उनके उद्धार का विश्वास दिलाया। इसके बाद हनुमान जी ने अशोक वाटिका में उत्पात मचाकर रावण की सेना को चुनौती दी। राक्षसों के साथ भीषण संघर्ष के बाद मेघनाद उन्हें बंदी बनाकर लंकापति रावण के भव्य दरबार में ले आया।
दस सिरों वाले दशानन रावण का दरबार राजसी वैभव और शान-शौकत से सजा था। अपने विशाल साम्राज्य, अपार शक्ति और पराक्रम के मद में चूर रावण ने हनुमान जी को भयभीत करने का प्रयास किया। मगर रामदूत हनुमान उसकी धमकियों के सामने तनिक भी विचलित नहीं हुए। उन्होंने निर्भीकता से रावण को अधर्म का मार्ग छोड़ने और माता सीता को सम्मानपूर्वक प्रभु श्रीराम के पास लौटाने की सलाह दी। हनुमान जी की खरी-खरी बातें सुनकर रावण क्रोध से तिलमिला उठा। विवेक पर अहंकार हावी होने के कारण उसने हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का आदेश दे दिया।
राक्षसों ने जैसे ही हनुमान जी की पूंछ में आग लगाई, पवनपुत्र ने अपने अद्भुत पराक्रम से रावण की स्वर्णनगरी को तहस-नहस करना शुरू कर दिया। वे एक महल से दूसरे महल तक छलांग लगाते हुए लंका में आग लगाते गए। देखते ही देखते सोने की लंका आग की लपटों से घिर गई और रावण का अभिमान धुएं में उड़ता नजर आया। इस रोमांचक दृश्य पर दर्शकों ने तालियों और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा मैदान गुंजायमान कर दिया।
रावण की महत्वपूर्ण भूमिका में डॉ. राकेश कुमार कन्नौजिया ने अपनी ओजपूर्ण आवाज, प्रभावशाली संवाद अदायगी और दमदार भाव-भंगिमाओं से दशानन के अहंकार, क्रोध और राजसी ठाठ को मंच पर जीवंत कर दिया। उनके सशक्त अभिनय ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। वहीं हनुमान की भूमिका में कृष्ण मुरारी कन्नौजिया ने अपने पराक्रमपूर्ण अभिनय से खूब तालियां बटोरीं। राम के रूप में अमरेश कुमार कन्नौजिया, लक्ष्मण के रूप में निखिल कुमार कन्नौजिया, सुग्रीव के रूप में शिवनारायण शर्मा तथा सुरसा की भूमिका में दयाराम कन्नौजिया सहित अन्य कलाकारों ने भी शानदार अभिनय कर दर्शकों का मन मोह लिया।
इस मौके पर रामलीला मंडली के व्यास दिलीप कुमार कन्नौजिया, निर्देशक विश्वनाथ शर्मा, महंत दयाराम कन्नौजिया, प्रेमचंद कन्नौजिया सहित रामलीला समिति के पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। लंका दहन की लीला ने एक बार फिर संदेश दिया कि अहंकार चाहे कितना भी विशाल क्यों न हो, सत्य और धर्म के सामने उसका टिकना असंभव है।

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